Monday, 16 March 2015

एग्ज़िट पोल

ये एग्ज़िट पोल क्या होता है? वो होता है जो हम सुनना चाहते हैं। ज़िद करते हैं वही सुनने की जैसा कि हम होते देखना चाहते हैं। अच्छा! तो क्या प्रेम में भी एग्ज़िट पोल होता है? नहीं! नहीं होता। पर क्यों? क्योंकि प्रेम वर्तमान स्थित है, एग्ज़िट पोल भविष्य में। तुम मेरी हो ये वर्तमान है। यथार्थ है। तुम मेरी होकर रहोगी, यह तुम्हारा अतिक्रमण है, यही एग्ज़िट पोल भी है। वो दिल्ली को जी जान से चाहता है यह उसका वर्तमान है। दिल्ली को वह केवल अपना बना लेना चाहता है यह एग्ज़िट पोल। भविष्य की परवाह में वो प्रेम से परे चला जाना चाहता है। अच्छा? और तुम्हारा प्रेम क्या है? मेरा प्रेम रोज़ सभाएं करता है। पोस्टर चिपकाता है। लाठियां खाता है, बगैर सीटों और सत्ता की परवाह किए।

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