Sunday, 29 March 2015

कॉलेज सीनियर एन्ड अ लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप

हे यू नो व्हाट? वो बोहत केयरिंग हैं। रोज़ मुझसे पूछते हैं, खाना खाई? पढ़ाई कैसी चल रही है? डाइट पे ध्यान दो। एट्सेक्ट्रा। हमारे पूरे बैच में केवल मुझसे ही बातें करते हैं।
हम्म
वो न बिलकुल तुम्हारी ही तरह हैं। क्यूट एन्ड केयरिंग। कभी कभी उन्हें देखकर तो मुझे तुम्हारी याद आ जाती है।
मेरी तरह हैं?
मेरा वो मतलब नहीं था पागल.. !
वो तुम्हारे सीनियर हैं।
हां तो?
तो यह कि वो अपने बैच का एकमात्र सिंगल बन्दा भी है।
व्हाट डू यू मीन?
कुछ नहीं, बस यही कि इन्ही चेप हरकतों की वजह से वो सिंगल रह गया। एनिवेज़। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं।
अब तुम पज़ेसिव हो रहे हो
मैं नहीं हो रहा हूं। खैर, छोडो।
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Monday, 23 March 2015

फ्रैंडशिप

फ्रैंड्स ?
हां, श्योर !
मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूं ...
हम ऑलरेडी फ्रैंड्स हैं पागल,
कैसे ?
बस जैसे सब होते हैं वैसे वाले और कैसे..
नहीं वैसे वाले फ्रैंड्स नहीं, सीरियस वाली
फ्रैंडशिप चाहिए मुझे
ठीक है, फ्रैंड्स...फ्रैंड्स ... फ्रैंड्स....., अब खुश ?
ये क्या था?
तीन बार बोलने से हम हमेशा हमेशा के लिए
दोस्त बन गए न,
हम्म (...तुम कभी भी मेरा मतलब समझ के भी
नहीं समझोगी....)

Monday, 16 March 2015

पर्दा

कितनी ज्यादा शांति है यहां.. ठीक से बात भी नहीं कर सकते। और पर्दे कहां चले गए? पहले तो एसी में पर्दे हुआ करते थे?
हां होते तो थे। पर सुना है आजकल रेलवे ने हटवा लिए।
सभी बोगियों से हटवा लिए?
नहीं। केवल थर्ड एसी से! सेकेण्ड और फर्स्ट में होते हैं अब भी।
क्यों? बाकी एसी वाले इतने अनरोमैन्टिक होते हैं क्या?

रेड रोज़

ये गुलाब ही इतना रोमैन्टिक क्यों लगता है? क्या कहते हैं, हां.. रेड रोज़। और कुछ क्यों नहीं देते। रेड रोज़ ही क्यों। मेरे घर में गुड़हल और गेंदा भी लगा है। तुम कहो तो कल ...
नहीं
क्यों? क्यों नहीं??
क्योंकि वो आसानी से मिल जाता है।
एग्ज़ैकटली! इसीलिए तो कहा कि कल आसानी से मैं गुड़हल तोड़ लाऊंगा।
नहीं!! एक काम करना कुछ मत लाना। मुझे आज से कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं है। समझे।
ऐसा क्यों कह रही हो?
मैंने कहा तो.. क्योंकि वो आसानी से मिल जाता है।
तो?
क्या मैं आसानी से मिली?
नहीं
फिर? जिस दिन चीज़ें आसान लगने लगीं। उस दिन मैं भी आसान लगने लगूंगी। समझे?
ह्म्म्म..

पर्ची

स्टेशन आने वाला था। न जाने फिर वो अजनबी कब दोबारा दिखती? कागज़ की पर्ची में नंबर लिखकर वो उसकी सीट पर छोड़कर उतर गया। ट्रेन चल दी। लड़की नें तुरंत पर्ची खिड़की के बाहर फेंक दी। उस दिन फोन को अपने हाथ से अलग नहीं होने दिया। बार बार फोन उठा उठाकर देखता। फोन नहीं आना था। नहीं आया। वो अब भी सोचता है कि पर्ची उसे मिली होगी या नहीं ?

चार कदम

जीता कोई नहीं पर दिल्ली उसकी शिद्दत के चलते हार गई। वो देखो, दिल्ली खड़ी है। चार कदम नहीं, पूरे पांच साल उसके साथ, उसका हांथ पकड़े चलने को।

एग्ज़िट पोल

ये एग्ज़िट पोल क्या होता है? वो होता है जो हम सुनना चाहते हैं। ज़िद करते हैं वही सुनने की जैसा कि हम होते देखना चाहते हैं। अच्छा! तो क्या प्रेम में भी एग्ज़िट पोल होता है? नहीं! नहीं होता। पर क्यों? क्योंकि प्रेम वर्तमान स्थित है, एग्ज़िट पोल भविष्य में। तुम मेरी हो ये वर्तमान है। यथार्थ है। तुम मेरी होकर रहोगी, यह तुम्हारा अतिक्रमण है, यही एग्ज़िट पोल भी है। वो दिल्ली को जी जान से चाहता है यह उसका वर्तमान है। दिल्ली को वह केवल अपना बना लेना चाहता है यह एग्ज़िट पोल। भविष्य की परवाह में वो प्रेम से परे चला जाना चाहता है। अच्छा? और तुम्हारा प्रेम क्या है? मेरा प्रेम रोज़ सभाएं करता है। पोस्टर चिपकाता है। लाठियां खाता है, बगैर सीटों और सत्ता की परवाह किए।

दिल्ली

मेरे लिए क्या कर सकते हो? कुछ भी! कुछ भी में क्या? कुछ भी...ह्म्म्म.. हां। केजरीवाल सी मोहब्बत करूंगा। तुम्हारे लिए सारी दुनिया से लड़ जाऊंगा। कैसे? केजरीवाल जैसे। इस पार एक अकेला आदमी और उस पार सारी दुनिया उसके पीछे। उसका क्या होगा मालूम नहीं। जीतेगा हारेगा.. पर शिद्दत क्या होती है, उस बंदे से पूछो। कोहराम मचा रखा है।

ये कहानी फिर सही

ये गुलाम अली की आवाज़ है? ग़ुलाम अली कितना अच्छा गाते हैं न? हां। पर ये चंदन दास हैं। नहीं, गुलाम अली ही हैं। नहीं नहीं, चंदन दास हैं। लगा लो शर्त, हार जाओगे, गुलाम अली हैं। अच्छा ठीक है- गुलाम अली हैं। सारे चंदन दास- गुलाम अली हैं। खुश?

बिजीनेस

तुम जानबूझकर मुझे लेट रिप्लाइ क्यों करते हो? ऐसा नहीं है।ऐसा है! नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है। मैं बस थोडा बिज़ी रहता हूं, इसीलिए। कैसे? बहुत काम रहता है? नहीं! फिर? कॉर्पोरेट सेक्टर में कोई बिज़ी रह ही नहीं सकता। फिर तुम कैसे बिज़ी हो सकते हो? फील कराना पड़ता है, डैट यू यार डैम बिज़ी राइट नाउ। भले ही काम हो न हो। फीलिंग आनी चाहिए। भले ही एक जीमेल अकाउंट को बार बार लॉगआउट और लॉगइन करते रहो। पर फील आनी चाहिए। जिस काम को १ घंटा लगता हो। उसमे २ घण्टे लगाओ। समझी कुछ! हम्म..

पॉलिटिकल व्यू

लुक, वो केजरीवाल कितना क्यूट दिखता है न? जस्ट अ सिंपल कॉमन मैन..
हां! पर उसे भागना नहीं चाहिए था। सीएम शुड बी रिस्पॉन्सिबल। किरण बेदी को देखो, बोल्ड लेडी है। काम करके दिखाएगी।
मैंने बोला न केजरीवाल। मतलब केजरीवाल। मुझे वो किरण बेदी बिलकुल भी पसंद नहीं। एण्ड यू नो व्हाट, बीजेपी मीन्स कम्यूनल पॉलिटिक्स। तुमको कुछ पता वता नहीं है। देख लेना वो आएगा और करप्शन की छुट्टी।
हां, बात तो सही है। एक बार और देख लेना चाहिए। तुम कहती हो तो। वैसे मुझे भी कोई प्रॉब्लम नहीं है उसके साथ। मैं तो बस एसई।

कॉमर्स

तुम समझते क्यों नहीं कि वो नहीं मानेंगे। उन्हें गवमेंट एम्प्लॉय चाहिए। तुमको मालूम भी है कि ये प्राइवेट जॉब वगैरह... !
हम्म
मैथ्स क्यों नहीं लिए? कॉंमर्स ले लिए। बीकॉम जैसी डिग्री और फिर एमबीए। ये तो आजकल कोई भी कर लेता है।
तो फिर क्या करता? मैथ्स वीक थी न मेरी।
ऐंजीनियरिंग करते। खैर छोडो रहने भी दो तुम। ये कहो कि कभी रिस्क ही नहीं लिया। तुम कॉमर्स वाले भी न एकदम डम्बो होते हो, डम्बो।
हम्म।
अच्छा तुम वो ग्रीन वाला सूट क्यों नहीं पहनी? कितने दिन हो गए।
उफ्फ्फ...

पजेसिवनेस

तुम मुझे लेकर इतना पज़ेसिव क्यों होते हो! मैंने बात क्या कर ली उससे, तुम तो एकदम....
कहां हुआ पोसेसिव?? ऐसा क्यों सोचती हो?
पोसेसिव नहीं, पज़ेसिव। तुमको तो ढंग से इंग्लिश भी नहीं आती।
ह्म्म.. पर देखो मुझे तुम्हारे उससे बात करने में कोई प्रॉब्लेम नहीं है। मैं पोसेसिव नहीं हूं। पर वो लड़का अच्छा नहीं है।