Monday, 16 March 2015

चार कदम

जीता कोई नहीं पर दिल्ली उसकी शिद्दत के चलते हार गई। वो देखो, दिल्ली खड़ी है। चार कदम नहीं, पूरे पांच साल उसके साथ, उसका हांथ पकड़े चलने को।

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