Monday, 16 March 2015

पर्ची

स्टेशन आने वाला था। न जाने फिर वो अजनबी कब दोबारा दिखती? कागज़ की पर्ची में नंबर लिखकर वो उसकी सीट पर छोड़कर उतर गया। ट्रेन चल दी। लड़की नें तुरंत पर्ची खिड़की के बाहर फेंक दी। उस दिन फोन को अपने हाथ से अलग नहीं होने दिया। बार बार फोन उठा उठाकर देखता। फोन नहीं आना था। नहीं आया। वो अब भी सोचता है कि पर्ची उसे मिली होगी या नहीं ?

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